Akbar birbal short stories in Hindi ! Best & 5 New Story

Akbar birbal short stories in Hindi

Akbar birbal short stories in Hindi : यहाँ हम आपको अकबर बीरबल से जुड़ी 5 बेहतरीन कहानियाँ बताने जा रहे हैं। बैसे तो अकबर बीरबल को लेकर काफी किस्से और कहानी हैं। उन में से काफी आपने पहले से ही पढ़ रखे होंगे। और बहुत सी कहानियाँ किताबों में भी होती है। तो वहीं कई प्रकाशकों ने तो अकबर बीरबल को लेकर अलग से किताबें निकाली हैं। क्योंकि हमारे देश में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी अकबर बीरबल की कहानियाँ बहुत ही प्रसिद्ध हैं। यहाँ हमने कोशिश की है कि हम आपको बह कहानियाँ और किस्से बताए जो अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण हों। और शायद ही आपने पढे हों। Akbar birbal short stories in Hindi.

Akbar birbal short stories in Hindi

1 दिन मंत्री बीरबल अपने किसी संबंधी के यहां निमंत्रण में जाना था। जिसे वह दरबार खत्म होने से पहले बादशाह अकबर से अवकाश लेकर विदा हुए। दूसरे दिन जब बीरबल आए तो बादशाह ने निमंत्रण के भोजन के बारे में बीरबल से पूछना शुरु कर दिया। वह पूछने लगे, कि खाना कैसा बना था? क्या क्या था? आदि। बीरबल ने बादशाह अकबर को सभी पकवानों के नाम बता दिए। और कुछ बता ही रहे थे कि बादशाह ने उन्हें किसी दूसरे काम में उलझा दिया। जिनसे उनका कहना भी बंद हो गया।

Akbar birbal short stories in Hindi
Akbar birbal short stories in Hindi

इस घटना को अब बहुत दिन बीत चुके थे। 1 दिन बादशाह अकबर दरबारियों के साथ बैठे थे। उनके साथ बीरबल भी बैठे थे। आज बादशाह को स्मरण शक्ति आया कि बीरबल ने उस दिन कहते-कहते अधूरे में ही भोजन की पकवानों के बारे में बताना छोड़ दिया था। और उन्हें आज बीरबल की स्मरण शक्ति की परीक्षा लेनी थी। बे बोले बीरबल और क्या?

बीरबल समझ गए कि महाराज उस दिन की भोजन के पकवानों के बारे में पूछ रहे हैं। क्योंकि पकवानों के नाम बताते बताते मैं किसी दूसरे सवाल में उलझ गया था। वह बात अधूरी ही रह गई थी। बादशाह उसी को पूरा करने की गरज से पूछ रहे थे। बीरबल ने तत्काल ही उत्तर देना शुरू कर दिया। बीरबल की स्मरण शक्ति से राजा बहुत खुश हुए और उन्हें अपने गले मैं डरा मोतियों का हार उतार कर दे दिया। Akbar birbal short stories in Hindi

 

यह भी पढ़ें : Short Moral Stories in Hindi, Top 10 Small story for kids हिंदी में

Akbar birbal short stories in Hindi written

गर्मी के दिन थे। बादशाह अकबर दरबारियों के साथ नौका में बैठकर बिहार कर रहे थे। नौका नदी के बीच में जा पहुंची। तभी राजा ने एक तिनका हाथ में लेकर कहा कि, जो इस तिनके के सहारे इस नदी को पार करेगा। उसे मैं 1 दिन के लिए विजयनगर का बादशाह बना दूंगा। दरबारी एक दूसरे का मुंह देखने लगे।

बीरबल बोला, यह काम मैं कर सकता हूं। मगर बादशाह बनने के बाद। बादशाह अकबर बोले, ठीक है। आज के लिए में तुम्हें बादशाह बनाता हूं। राज पटल, महल और अंग रक्षकों को तुम्हें सौंपता हूं। इस तिनके को तुम राजदंड समझो। अब इसी के सहारे नदी पार करके दिखाओ। वरना मृत्यु दंड मिलेगा। यह कहकर महाराज अकबर ने वह तिनका बीरबल को दे दिया।

बीरबल तिनका लेकर नदी में कूदने को हुआ। कूदने से पहले उसने अंग रक्षकों से कहा! मैं स्वयं राजा हूं। तुम अपने कर्तव्य का पालन करो। सुनते ही अंग रक्षकों ने उसे पकड़ लिया। आप राजा हैं, इसलिए हम आपको जान जोखिम का काम नहीं करने देंगे। बीरबल ने समझाया मगर वे नहीं माने। इतने में नौका दूसरे किनारे पर जा लगी।

बादशाह अकबर बोले, बीरबल तुम हार गए। जहांपनाह! मैंने तो तिनके के सहारे ही नदी पार की। यह मेरे पास ना होता तो अंगरक्षक कूदने से भला क्यों रोकते? तब मैं नदी में डूब जाता। सुनते ही बादशाह अकबर हंसकर बोले! तुमसे जीतना सचमुच मुश्किल है। Akbar birbal short stories in Hindi

यह भी पढ़ें : Moral stories in Hindi for class 8th कक्षा 8 कीं मॉरल कहानियाँ!

Short story of akbar and birbal in Hindi

एक बार बादशाह अकबर ने भरी सभा में घोषणा की, कि इस बार मोहर्रम पर सभी दरबारी अपने महलों को अच्छी तरह सजाएं। जिसके महल में सबसे अच्छी रोशनी होगी। उसे पुरस्कार दिया जाएगा। मोहर्रम का दिन आया बादशाह अकबर अपने घोड़े पर बैठकर सभी के महलों की रोशनी को देखने के लिए निकल पड़े। सभी के महल जगर मगर कर रहे थे।

बीरबल के महल के आगे राजा अचानक रुक गए। बोले, बस दो-चार दीपक। तुमने हमारी आज्ञा का पालन नहीं किया है। बादशाही को लेकर बीरबल नगर के बाहर गरीबों की बस्ती मैं गया। वहां जो झोपड़ियां प्रकाश से दमदमा रही थी। बीरबल, बादशाह अकबर से बोला! बादशाह देखिए, आपकी आज्ञा का मैंने ही सही पालन किया है। इन्हें ही रोशनी की सबसे ज्यादा जरूरत है। बादशाह ने मुस्कुराकर पुरस्कार की राशि गरीबों में बांट दी। Akbar birbal short stories in Hindi

यह भी पढ़ें : तेनाली राम और महाराज कृष्णदेव राय की कहानी Hindi moral stories

Akbar birbal moral stories in Hindi

एक बार की बात है महाराज अकबर महारानी के आगे बीरबल की चतुराई की प्रशंसा कर रहे थे। तभी रानी बोली महाराज बीरबल कितना ही चतुर हो, लेकिन मुझसे जरूर हार जाएगा। महाराज अकबर ने कहा ठीक है, परीक्षा कर लेते हैं। दूसरे दिन दरबार उठने के बाद बादशाह ने बीरबल को महल में बुलवा लिया। रानी ने बीरबल के लिए सुगंधित शरबत और फल मिठाई लाने के लिए दसियों को आदेश दिया। दासी के जाते ही रानी गिनती करने लगी और एक से 10 तक की गिनती गिन कर बोली। अब दासी ने तश्तरी में शरबत तथा मिठाई और फल रख लिए हैं।

Akbar birbal short stories in Hindi
Akbar birbal short stories in Hindi

सचमुच दासी सब सामान लिए मौजूद थी। रानी बोली बीरबल देखो हमारा कितना नपा तुला अंदाज है? कल हम तुम्हारे यहां दावत खाने आएंगे। बीरबल ने सोचा, रानी खुद दावत पर आने को कह रही हैं। जरूर कुछ दाल में काला है। वह सारी बात समझ गया बादशाही ने रानी से कहा! आप तो बीरबल की परीक्षा लेने के लिए कह रही थी। क्यों नहीं ली? रानी बोली! कल बताऊंगी। अगले दिन बादशाह अकबर और महारानी बीरबल के घर पहुंचे। थोड़ी देर बाद उसने खाना लगाने का आदेश दिया।

तभी रानी बोली! बीरबल क्या तुम हमारी तरह कहकर बता सकते हो कि खाना कितनी देर में आ जाएगा? वह बोला रानी जी आपके सामने मेरा बोलना, में अच्छा नहीं समझता। आप गिनती गिनिए जब आप रुक जाएगी, तभी खाना हाजिर हो जाएगा। रानी ने गिनती खत्म कर दी। खाना आ गया। बादशाह बोले! रानी, आप शर्त हार गई. तभी बीरबल बोला जीत रानी जी की हुई है। खाना तो इन्हीं के गिनने से आया। रानी ने कहा बीरबल तुम सचमुच दरबार के रत्न हो। हमें हराया भी तो जिता कर। Akbar birbal short stories in Hindi

Akbar birbal non veg short stories in Hindi

एक बार की बात है। अकबर का दरबार चल रहा था। तभी कुछ दरबारियों ने अकबर से आकर कहा कि महाराज आजकल बीरबल को ज्योतिष का शौक चढ़ा है। कहता कहता है कि मंत्रों से मैं कुछ भी कर सकता हूं। तभी दूसरे दरबारी ने महाराज के कान भरे। हां महाराज! वह बहुत शेखी बघारता फिरता है। हम तो परेशान हो गए हैं। उसे दरबार के काम में जरा भी रुचि नहीं।

राजा बोले अच्छा, परख कर देखते है, बीरबल के मंत्रों में क्या-क्या दम है। यह कहते हुए राजा ने एक दरबारी से कहा कि तुम यह अंगूठी छिपालो। इसी के बारे में बीरबल से पूछेंगे। तभी बीरबल दरबार में आ गए। महाराजा अकबर को प्रणाम करके वह अपनी जगह पर बैठ गए।

अकबर बोले, बीरबल अभी-अभी मेरी अंगूठी कहीं गायब हो गई है। जरा पता लगाओ। सुना है तुम तंत्र मंत्र से कुछ भी कर सकते हो। बीरबल ने दरबारियों की ओर देखा, और समझ गए कि उसके विरुद्ध महाराज के कान डटकर भरे गए हैं। कुछ सोचकर उसने कागज पर आड़ी तिरछी रेखाएं खींची, और बोला महाराज! आप इस पर हाथ रखे। अंगूठी जहां भी होगी अपने आप आ जाएगी। राजा ने उस तंत्र पर हाथ रख दिया। तभी बीरबल चावल हाथ में लेकर दरबारियों  की ओर देखने लगा।

जिसके पास अंगूठी थी, वह सोचने लगा कहीं सचमुच अंगूठी निकलकर राजा के पास न चली जाए। बीरबल यह देख रहा था। बीरबल बोला! महाराज अंगूठी तो मिल गई, लेकिन उस दरबारी ने कसकर पकड़ रखी है। महाराजा अकबर, बीरबल का संकेत समझ गए। उन्होंने बीरबल को वह अंगूठी पुरस्कार के रूप में दे दी। इससे चुगली करने वालों के सिर शर्म से झुक गए। Akbar birbal short stories in Hindi

यह भी पढ़ें : लकी स्टोन का चमत्कार, सुजीत पहलवान और चमत्कारी अंगूठी की कहानी

Akbar birbal short stories in Hindi

एक बार की बात है। महाराज अकबर अपने दरबार के कामकाज और कार्यों से फुर्सत होकर बीरबल के साथ गपशप कर रहे थे। उसी बीच बादशाह को एक अधर महल बनवाने की इच्छा हुई। इस अभिप्राय से प्रेरित होकर बादशाह अकबर, बीरबल से बोले! क्या तुम मेरे लिए एक अधर महल बनवा सकते हो? बादशाह ने यह भी कहा कि बनवाने का काम सिर्फ तुम्हारा है। और उसमें जो भी खर्चा आएगा वह सारा मैं उठाऊंगा।

बीरबल ने सोच विचार कर उत्तर दिया! बोले बादशाह, थोड़ा ठहर कर महल बनवाने का कार्य शुरू करूंगा. इस कार्य के लिए कुछ मुख्य मुख्य सामानों का संग्रह करना पड़ेगा। बादशाह इस पर राजी हो गए। तभी बीरबल ने एक दूसरी बात छेड़कर बादशाह का मन दूसरे कामों में उलझा कर। शायकाल का अवकाश पाकर लौट गए। दूसरे ही दिन बहेलियों को रुपए देकर जंगल से तोतों को पकड़कर लाने की आज्ञा दी। हुकुम की देर थी कि वहेलिए उसी दिन सैकड़ों तोते पकड़ कर ले आये।

बीरबल ने उन तोतो को खरीद लिया, और उनकी पढ़ाई का काम अपनी बुद्धिमती कन्या को सौंप कर वह दरबार का आवश्यक कार्य करने लगे। लड़की ने पिता के आदेशानुसार तोतो को पढ़ा कर पक्का कर दिया। जब बीरबल ने उनकी परीक्षा ली थी। तो वह उसकी मर्जी के माफिक निकले। फिर क्या था? वह तोतो को लिए हुए दरबार में हाजिर हुआ। तोतों को दीवाने खास मैं बंद कर बीरबल बादशाह के पास गए। तोते बाहर निकल कर छोड़ दिए थे। सब तरफ से के बाद बंद थे शिक्षा के अनुसार भीतर ही भीतर राग अलाप रहे थे।

तभी बीरबल बादशाह के पास पहुंचे और उन्हें सलाम करते हुए कहा, आपकी मर्जी के मुताबिक अधर महल में काम लगवा दिया है। इस समय उसमें बहुत से पेश राज और मिस्त्री काम कर रहे हैं। आप चलकर मुआयना कर ले। बादशाह महल देखने की इच्छा से बीरबल के साथ चल पड़े। जब बीरबल दीवान खाने के पास पहुंचा तो उसका किवाड़ खुलवा दिया। तोते बाहर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगे। ईटे लाओ, चूना लाओ, किवाड़ लाओ, चौखट तैयार करो, दीवार चुनो।

इस प्रकार तोतो ने आकाश में खूब शोर किया। तब बादशाह ने बीरबल से पूछा! क्यों बीरबल यह तोते क्या कर रहे हैं? बीरबल ने अदब के साथ उत्तर दिया। महाराज आपका अधर महल तैयार हो रहा है। उसमें ये राज मिस्त्री और कई बढ़ई लोग लगे हुए हैं। सब समान एकत्रित हो जाने पर महल बनना शुरू हो जाएगा। बीरबल की बुद्धि पर बादशाह प्रसन्न हुआ और उसको बहुत सा धन देकर विदा किया। Akbar birbal short stories in Hindi.

यह भी पढ़ें : Friendship story in Hindi 21 Best Famous short stories for Friend’s

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *