Friendship story in Hindi 21 Best Famous short stories for Friend’s

Friendship story in Hindi

Friendship story in Hindi : Read The best moral stories on friendship in Hindi, English & Telugu Language. Here is Available & valuable famous short story about friendship. You Get any Example of  a small Friendship story in Hindi. This stories Specially for Kids, But You can also Read this Friendship story in Hindi, English & Telugu.

Friendship story in Hindi

एक शाम जब मैं ऑफिस से घर लौटा। तो पत्नी बोली, कि आज तुम्हारे बचपन के दोस्त आए थे। उन्हें ₹10000 की तुरंत आवश्यकता थी। मैंने तुम्हारी अलमारी से रुपए निकाल कर उन्हें दे दिए। कहीं लिखना हो तो लिख देना।

इस बात को सुनकर मेरा चेहरा हतप्रभ हो गया। आंखें गीली हो गई। में अनमना सा हो गया।

पत्नी ने देखा! अरे क्या बात हो गई? मैंने कुछ गलत कर दिया क्या? उसके सामने तुमसे फोन पर पूछने पर उन्हें अच्छा नहीं लगता। तुम सोचोगे कि इतना सारा धन मैंने तुमसे पूछे बिना कैसे भी दिया? पर मैं तो यही जानती थी, कि वह तुम्हारा बचपन का दोस्त है। तुम दोनों अच्छे दोस्त हो इसलिए मैंने हिम्मत कर ली और कोई गलती हो तो माफ कर दो।

मैं बोला ! कि मुझे दुख इस बात का नहीं है कि तुमने मेरे दोस्त को पैसे दे दिए। तुमने बिल्कुल सही काम किया है। तुमने अपना कर्तव्य निभाया, मुझे इस बात की बहुत खुशी है। मुझे दुख तो इस बात का है। कि मेरा दोस्त तंगी में है। यह मैं कैसे समझ नहीं पाया। उसे ₹10000 की आवश्यकता आन पडी। इतने समय में मैंने उसका हाल-चाल भी नहीं पूछा। Friendship story in Hindi

मैंने कभी यह सोचा भी नहीं कि वह मुश्किल में होगा। मैं भी कितना स्वार्थी हूं? कि अपने दोस्त की मजबूरी नहीं समझ पाया.

जिस दोस्ती मैं लेने देने का गणित होता है। वह केवल नाम की दोस्ती होती है। उसमें अपतत्व नहीं होता। हमने किसी का एक काम किया है। तो सामने वाला भी हमारा काम करेगा। ऐसी अपेक्षा रखना यह दोस्ती नहीं दोस्ती को दिल के दरवाजे की खामोश घंटी है। साइलेंट बैल है। जो बजे या न बजे हमें भीतर से ही इसकी आवाज सुन लेनी चाहिए। यही होती है सच्ची दोस्ती। Friendship story in Hindi

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True friendship story in Hindi

Friendship story in Hindi 1
Friendship story in Hindi 1

शाम का समय था। घड़ी में अब 7:00 बज चुके थे। आसमान में बादल छाए हुए थे। इसी वजह से राहुल आज ऑफिस से जल्दी निकल गया। वह आज बहुत खुश था, और अपनी नई कार को चलाने के लिए, कार के अंदर एक अच्छा सा गाना बजा रहा था। उसे अचानक से पता नहीं क्यों ऐसा लगा कि जैसे वह कुछ जरूरी चीज भूल गया है। उसने वहां देखा, लेकिन फिर भी उस भूली हुई चीज को नजर अंदाज कर दिया।

5 मिनट बाद उसके पास एक फोन आया। उसने कार बंद कर दी, ताकि वह आराम से बात कर सके। जैसे ही वह कॉल खत्म हुआ, तो उसने कार की खिड़की से बाहर झांका तो देखा कि उसने गलती से कार को अपने उसी पुराने अड्डे पर रोक दिया था। जहां पर वह अपने दोस्तों के साथ मिला करता था। उसने सड़क के किनारे कार पार्क की, और चाचा की चाय स्टाल पर चला गया।

ये उसके पैर नहीं थे, जो उसे वहां तक लाए थे। बल्कि उसका दिल था जो उसे वह खींच ले आया था।

वह पुरानी यादों की तरफ जा रहा था। उसके अजीबोगरीब हर दोस्तों को हरा-भरा बनाता है। जिसमें से कुछ दोस्त ऐसे थे ग्रुप में। एक दोस्त को कभी भी नहीं पता था कि आसपास क्या चल रहा है? आखिर ग्रुप में कर क्या रहा था? ग्रुप में एक दोस्त ऐसा था जो किसी भी पार्टी खाने या खेलने में पैसों वाली चीज में कभी कंट्रीब्यूट्स नहीं करता था। लेकिन हां मजे पुरे लेता था।

इसे हम अपने ग्रुप का भिकारी दोस्ती भी कह सकते हैं। ग्रुप में एक ऐसा भी दोस्त था, जिसे हर कोई सरनेम से बुलाता था। और हर कोई यह भूल जाता था कि उसका वास्तविक नाम आखिर है क्या?

ग्रुप में एक दोस्त को बार-बार प्यार में पड़ने की अजीब आदत थी। उसे हर दूसरे दिन किसी ना किसी लड़की से प्यार हो जाता। ग्रुप में एक दोस्त मोटू भी था, जो कभी भी टाइम से खाना नहीं खाता था। जबकि कुछ ऐसे भी थे। जो खाते-खाते थकते ही नहीं थी। लेकिन फिर भी ऐसे लगते थे। जैसे कोई पतली डंडी भी उनसे मोटी दिखती हो। अंत में उसने याद किया कि एक प्लानर था ग्रुप का। Friendship story in Hindi 

जो किसी भी चीज के लिए बस पहले प्लान बनाता था। तभी उसे ध्यान आया जब वह ऑफिस से निकल रहा था।

उसी समय उसने अपने ग्रुप का फेवरेट गाना लगाया जो अभी उस टाइम पर सुना करते थे। और यही वो चीज थी जो उसे कुछ भूलने का एहसास दिला रही थी।

वह अपने दोस्तों को याद कर रहा था। उसके दिमाग में अभी भी वही सब बातें चल रही थी, लेकिन अचानक पीछे से एक आवाज आई। अरे भाई राहुल तुम! वाह चौंका दिया यार, तुमने इतने लंबे समय के बाद यहां आए हो और पहले यह बताओ पसंदीदा अदरक वाली चाय के साथ और क्या लेकर आऊं? यह पूछा उस छोटू बैटर ने।

उस छोटू के कहे हुए शब्द उसके दिल के किनारे तक आए, और उसे छोड़ दिया। राहुल ने छोटू से कहा, वह दोस्तों का बहुत पुराना ग्रुप, दोस्त ला सकते हो? लेकिन एक समझदारी के साथ उसने जवाब दिया। कुछ नहीं बस मुझे एक अदरक वाली चाय दे दो दोस्त। Friendship story in Hindi

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Story on true friendship in Hindi

Friendship story in Hindi 2
Friendship story in Hindi 2

अस्पताल के एक कमरे में अर्जुन और किशन नाम के दो बीमार दोस्त थे। दोनों अस्पताल के उस कमरे में थे। जिसमें सिर्फ एक ही खिड़की थी। जिसमें से अर्जुन को उस खिड़की पर 1 दिन में सिर्फ 1 घंटे की बैठने की इजाजत थी। जबकि किशन को गंभीर बीमारी होने की वजह से दिनभर अपना पूरा समय उस बिस्तर पर ही गुजारना पड़ता था। अस्पताल के एक ही कमरे में रह रहे अर्जुन और कृष्ण की दोस्ती दिन पर दिन गहराती ही ही जा रही थी।

दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे से अपने परिवार की हर छोटी बातें और अपने दिल की हर बात शेयर करने लगे। फिर खिड़की के पास बैठकर किशन अपने दोस्त अर्जुन को बाहरी संसार की सारी बातें बताने लगा। जिसे सुनकर अर्जुन को काफी अच्छा महसूस होता था। और वह धीरे-धीरे अपनी बीमारी को भी भूलने लगा था। और उसके अंदर जो जिंदगी जीने की आस खत्म हो गई थी वह फिर से एक बार जाग उठी।

किशन अपने दोस्त अर्जुन को कल्पना कर कुछ ऐसी सकारात्मक बातें बताया करता था। जिसे सुनकर अर्जुन मंत्रमुग्ध हो जाता था। किशन कभी बच्चों के पढ़ने की बातें अर्जुन को बताया करता था। तो कभी फूलों से भरे पार्क में बैठे हुए खुशहाल लोगों की बारे में बातें करता था। यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। दोनों दोस्त ऐसे ही मुश्किल घड़ी में एक दूसरे का दर्द में मरहम बनते, और अपनी बीमारी के दर्द को भूलने लगे थे।

तभी अचानक एक दिन किशन की मौत हो गई। जिसकी मौत की खबर सुनकर अर्जुन को बेहद दुख हुआ, और फिर जब उसके दोस्त किशन के मृत शरीर को नर्स वहां से हटा रही थी। तभी अर्जुन ने नर्स से रोते खिड़की के किनारे वाला पलंग लेने की इजाजत मांगी, और जैसे ही अर्जुन ने खिड़की के पीछे की तरफ से देखा तो सिर्फ खाली दीवार ही दिखाई दी।

तब उसने देखा कि खिड़की के बाहर ना कोई स्कूल का ग्राउंड था, जिसमें बच्चे खेलते थे। और रोज सुबह प्रेयर करते थे, और ना ही कोई हरा भरा फूलों से भरा पार्क था।

जिसका उसका दोस्त किशन अक्सर जिक्र करता था। जिससे उसका दोस्त अक्सर बाहर देखा करता था। वहां तो ऐसा कुछ नहीं था। उस नर्स ने जवाब दिया कि खिड़की के पीछे तो ऐसा कुछ भी नहीं था। फिर भी वह तुम्हारी हिम्मत बढ़ाते रहा था। कि तुम जिंदगी से हार ना मानो। याद रखिए आज कभी वापस नहीं आएगा। हमेशा एक दोस्त बन कर रहे।

लोगों को उत्साहित करते रहे। अपनों की रक्षा करें। कोशिश करें कि आपके शब्दों से कोई मायूस ना हो। Friendship story in Hindi

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Short story in Hindi on friendship

Friendship story in Hindi 3
Friendship story in Hindi 3

दो बचपन के दोस्त थे। एक का नाम था अजय और एक का नाम था बिजय। वह स्कूल में भी साथ पढ़ते थे, और जब उनका कॉलेज का टाइम आया तब भी वह साथ पढ़ते थे। जब वह बड़े हुए तो दोनों ने एक साथ फौज में भर्ती होने का निर्णय लिया। सौभाग्य से दोनों सेना के एक ही ग्रुप में भर्ती हो गए।
एक रात युद्ध के दौरान उन पर हमला हुआ। चारों तरफ से गोलियां बरस रही थी। अजय और विजय भी उस युद्ध में शामिल थे। अचानक से अंधेरे में से एक आवाज आई। अजय बोला इधर आओ मेरी मदद करो। बिजय ने अपने दोस्त अजय की आवाज को पहचान लिया और बिजय ने अपने कैप्टन से पूछा! क्या मैं वहां जा सकता हूं? कैप्टन ने जवाब दिया! नहीं, तुम्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दे सकता। क्योंकि मेरे पास पहले से ही आदमी कम है।

मैं एक और आदमी को खोना नहीं चाहता। तभी अजय की वहीं आवाज आई। बिजय, इधर आओ, मेरी मदद करो। अजय चुप रहा, क्योंकि कैप्टन ने उसे जाने की इजाजत नहीं दी थी। फिर वही आवाज बार-बार आने लगी तो बिजय खुद को और ज्यादा रोक नहीं पाया। उसने कैप्टन से कहा कैप्टन वह मेरे बचपन का दोस्त है। मुझे उसकी मदद के लिए जाना ही होगा।

कैप्टन ने बेमन से उसे जाने की इजाजत दी थी। बिजय अंधेरे में रेंगता हुआ आगे बढ़ा अपने खड्डे में ले आया। उन लोगों ने देखा कि अजय तो मर चुका था। कैप्टन नाराज हो गया और चिल्लाया, मैंने कहा था कि ना वह नहीं बचेगा। वह मर गया और तुम भी मारे जाते। मैं अपना एक और आदमी खो बैठता। तुमने वहां जाकर गलती की थी। बिजय ने जवाब दिया।

सर मैंने जो किया वह ठीक था। जब मैं अजय के पास पहुंचा, तो वह जिंदा था और उसके आखिरी शब्द थे, बिजय तुम जरूर आओगे!😢😢😢 Friendship story in Hindi

Two friends story

Friendship story in Hindi 4
Friendship story in Hindi 4

एक बार तो दोस्त रेगिस्तान पार कर रहे थे. किसी बात को लेकर रास्ते में उनका अचानक झगड़ा हो गया। एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को गुस्से में आकर थप्पड़ मार दिया। इस बात से दूसरे दोस्त के दिल पर बहुत ठेस पहुंची। और उसने रेत पर एक लकड़ी से लिखा। “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त से छोटा सा झगड़ा होने पर उसने मुझे थप्पड़ मार दिया” दोनों रेगिस्तान में एक दूसरे को छोड़कर नहीं जा सकते थे।

इसलिए उन्होंने सफर जारी रखा, और सोचा मंजिल पर पहुंचकर इस झगड़े को सुलझाया जाएगा। वे आपस में बिना बात किए एक साथ चलते रहे। आगे उन्हें एक बड़ी झील दिखाई दी। उन्होंने इस झील में नहाकर तरोताजा होने का फैसला किया। झील के दूसरे किनारे पर एक खतरनाक दलदल था। उस समय वह दोस्त जिसे दूसरे दोस्त ने चांटा मारा था।

तैरते तैरते झील के दूसरे किनारे पर दलदल में फंस गया और उसके दोस्त ने देखा तो वह भी उस तरफ से तैर कर वहां पहुंच गया और अपने दोस्त को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया। जिस दोस्त को दलदल से बचाया गया था। Friendship story in Hindi

उसने झील के किनारे एक बड़े पत्थर पर लिखा। आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई। दूसरे दोस्त ने पूछा जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा था, तो तुमने रेत पर लिखा था, लेकिन जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तुमने पत्थर पर लिखा। ऐसा क्यों किया? दूसरा दोस्त बोला, जब हमें कोई दुख पहुंचाता है तो हमें इसे रेत पर लिखना चाहिए। जहां बक्त और माफी की हवाएं उसे मिटा दें,

लेकिन जब हमारा कोई अच्छा करें और हमारे साथ अच्छा बर्ताव करे। तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए। जिसे कोई कभी मिटा ही ना सके। और हमें जिंदगी भर यह बात याद रहे कि दोस्त ने हमारी मदद की थी। Friendship story in Hindi

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