Moral stories in Hindi for class 8th कक्षा 8 कीं मॉरल कहानियाँ!

moral stories in hindi for class 8th

Moral stories in Hindi for class 8th : यहाँ पर आप कक्षा 8 के कोर्स में मौजूद तमाम नैतिक शिक्षा की कहानियाँ पढ़ सकते हैं। अलग अलग स्कूलों में मौजूद अलग अलग कोर्स की बजह से हमने यहाँ उन तमाम Moral stories को शामिल किया है। जो अक्सर सभी किताबों में मिल जाती हैं। आप यहाँ कई प्रमुख किताबों में मौजूद कहानियाँ पढ़ सकते हैं।

Moral stories in Hindi for class 8th

Moral stories in Hindi for class 8th 1
Moral stories in Hindi for class 8th 1

एक कस्बे में बहुत पुराना विद्यालय था। जिसमें आसपास की सभी मध्यमवर्गीय बच्चे पढ़ने के लिए आया करते थे। उसी स्कूल में एक नए मास्टर साहब बढ़ाने के लिए आए हुए थे। मास्टर साहब को आए हुए अभी कुछ हफ्ते ही हुए थे। कि क्लास के सभी बच्चे मास्टर साहब को बहुत पसंद करने लगे। दूसरे अध्यापकों की तुलना में, क्योंकि वह अच्छा पढ़ाने के साथ-साथ में बच्चों का मनोरंजन भी कराते थे। रोज बच्चों को नई नई कहानियां भी सुनाया करते थे। और उन्हें खेल भी सिखाते थे।

एक दिन मास्टर साहब क्लास में आए और सभी बच्चों से कहा कि मैं कल आप लोगों का एक टेस्ट लूंगा। तो सब अच्छे से तैयारी करके आना। सब ने कहा ठीक है।

दूसरे दिन सभी बच्चे पूरी तैयारी के साथ स्कूल पहुंचे, और क्लास में जाकर बैठ गए। और मास्टर साहब के आने का इंतजार करने लगे। जैसे ही स्कूल की घंटी बजी मास्टर साहब क्लास में आ गए। और सभी बच्चों को आंसर शीट जिसमें उत्तर लिखने होते हैं, दे दिया। और कहा कि अभी जो मैं क्वेश्चन पेपर दूंगा। उनके आंसर आपको इसी कागज में लिखकर पूरा करना है।

सब ने हां कह कर जवाब दे दिया। थोड़ी देर बाद मास्टर साहब ने क्वेश्चन पेपर यानी कि प्रश्न पत्र लिखे होते हैं वह भी दे दिया। जिसमें केवल एक छोटा सा पॉइंट यानी बिंदी बनी हुई थी। पेपर देने के बाद मास्टर साहब ने कहा कि आप सब लिखना शुरू कर सकते हो। सारे बच्चे थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गए, कि आखिर प्रश्न में इस अकेली बिंदी को देखकर वह क्या करें? लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ ना कुछ बिंदी के बारे में लिखा. किसी ने उस ब्लैक डॉट के जगह के बारे में लिखा, तो किसी ने उसके कलर के बारे में लिखा। और लिखने के बाद सबने अपने-अपने उत्तर मास्टर साहब को दे दिए।

मास्टर साहब ने उन सब के जवाब के लिए उन सभी बच्चों के सामने जोर-जोर से पढ़कर सुनाई। और वह सब इंतजार कर रहे थे, यह सुनने के लिए कि किसका जवाब सही है? लेकिन मास्टर साहब ने सही गलत के बारे में बात तक नहीं की। सब का जवाब पढ़ने के बाद मास्टर साहब ने कहा,

यह एक्जाम आपको सही गलत साबित करने या नंबर देने के लिए नहीं था। बल्कि एक बहुत जरूरी सीख देने के लिए था,

और वह सीख यह है कि आप सब ने अपने अपने उत्तर वाली पुस्तिका में कुछ ना कुछ उस डॉट के बारे में लिखा है, लेकिन उतने ही बड़े सफेद जगह के बारे में किसी ने कुछ भी नहीं लिखा। इसी तरह लोगों में चाहे हजारों अच्छाइयां क्यों ना हो, लेकिन हम उनकी बुराइयों को पहले देखते हैं। और यही बात हम पर भी लागू होती है। कि हमारे अंदर बहुत ज्यादा शक्तियां होती हैं। लेकिन हम केवल अपनी कमजोरियों के बारे में ही सोचते हैं। Moral stories in Hindi for class 8th.

यह भी पढ़ें : Friendship story in Hindi 21 Best Famous short stories for Friend’s

Short stories in Hindi for class 8th

Moral stories in Hindi for class 8th 2
Moral stories in Hindi for class 8th 2

एक गांव में एक भोला नाम का लड़का रहता था। भोला की घर की स्थिति इतनी खराब थी, कि वह 1 दिन काम नहीं करे तो घर वालों को भूखे पेट सोना पड़ता था, लेकिन भोला ने कभी भी अपने घरवालों को भूखा नहीं सोने दिया। वह दिन रात मेहनत करता था। जब वह बड़ा हुआ तो उसकी शादी हो गई, और शादी के कुछ ही दिनों बाद उसके दो बच्चे भी हो गए।

अब भोला की परेशानी और भी बढ़ गई, क्योंकि अब उसे घरवालों के साथ-साथ अपनी पत्नी और बच्चों का भी पालन पोषण करना था। बच्चों को पढ़ाना दिखाना भी था, और अन्य चीजों की भी व्यवस्था करनी थी। उसकी जिंदगी में एक परेशानी खत्म नहीं हो रही थी, कि दूसरी परेशानी आ जाती थी।

इन सब से परेशान होकर भोला गांव में आए हुए एक साधु महात्मा के पास पहुंचा। और अपनी सारी परेशानियों को भोला ने साधु बाबा से कहा, भोला ने साधु से कहा, महाराज मेरी जिंदगी में बहुत परेशानी चल रही है। एक परेशानी खत्म नहीं होती कि, दूसरी परेशानी शुरू हो जाती है।
साधु महाराज भोला की बात सुनकर मुस्कुराए और उसको गांव के किनारे एक नदी के पास लेकर चले गए। नदी के पास पहुंचकर साधु महात्मा ने कहा कि भोला तुम्हारे सवालों का जवाब मैं नदी के उस पार जा कर दूंगा। भोला ने कहा ठीक है। साधु महाराज नदी के किनारे जाकर खड़े हो गए।

काफी समय बीत गया, लेकिन साधु महात्मा न तो नदी के उस पार गए और ना ही कुछ बोले, अंत में परेशान होकर भोला ने साधु महाराज से पूंछ ही लिया, महाराजआप नदी के उस पार जाने को बोल रहे थे, परंतु आप काफी देर से एक ही जगह पर खड़े हैं। आप नदी के उस पार क्यों नहीं जा रहे? महात्मा ने जवाब दिया कि नदी को सूख जाने दो, फिर जाता हूं। यह सुनकर भोला का सर चकरा गया। और बोला महाराज नदी तो कभी भी सूखने वाली नहीं है। आपको उस पर जाने के लिए नदी में से होकर ही जाना पड़ेगा।

साधु महाराज बोले, मैं भी तो तुम्हें यही समझाना चाहता था, कि परेशानियां हमारी जिंदगी में नदी की तरह ही होती है। अगर हमें अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना है तो ऐसा ही करना पड़ेगा। इसीलिए जीवन में हर समस्या का सामना करो और अपनी जिंदगी में लगातार आगे बढ़ते रहो। और अगर आप सोचते हो कि लाइफ में कोई परेशानी ना हो, तो यह संभव नहीं है। क्योंकि हमारी लाइफ की यही समस्याएं, जो हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने को मजबूत करते हैं. Moral stories in Hindi for class 8th.

PeoplePerHour.com से पैसे कैसे कमाएं? Step By Step पूरी जानकारी हिंदी में

Short stories in Hindi with moral for class 8

Moral stories in Hindi for class 8th 3
Moral stories in Hindi for class 8th 3

ऋषिकेश के एक संत थे। जो अब अपनी वृद्धावस्था की ओर जा रहे थे। इसी कारण वह बहुत चिंतित भी थे, कि अब उनके पास जो इतना सारा जीवन भर का ज्ञान का भंडार है। वह कैसे अपनी आगे आने वाली पीढ़ी को देंगे। इसके लिए वह एक ऐसे छात्र को ढूंढ रहे थे, जो उनका उत्तराधिकारी बन सके।

संत महात्मा एक दिन अपने शिष्यों को लेकर कहीं दूर जंगल में निकल पड़े। जहां वह अपनी विद्या अपने शिष्यों को दे सकें। संत चलते रहे। दुर्गम पहाड़, पठार, नदियां आई किंतु संत नहीं रुके। एक दिन हुआ, 2 दिन हुए। वह निरंतर तीन-चार दिन और तीन चार रातें चलते रहे। वह रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर जो अन्य शिष्य साधु महात्मा के पीछे पीछे चल रहे थे।

उनमें से कुछ ने संत महात्मा से शिक्षा लेने का विचार बदल दिया, और वापस लौट गए। कुछ छात्र 2 दिन तक साथ चलते रहे, लेकिन फिर वह भूख प्यास से व्याकुल होकर अपने घर लौट गए। और कईयों ने बेहाल होकर साधु महात्मा का साथ छोड़ दिया। जबकि कुछ छात्र रास्ते में ही बेहोश हो गए। लेकिन संत महात्मा नहीं रुके। वह निरंतर चलते रहे।

अंत में ऋषि एक कुटिया में पहुंचे। तब तक उनके पास केवल दो ही शिष्य बचे थे। वह उन शिष्यों को लेकर उस कुटिया में गए, और प्रसन्नता पूर्वक कहा! मैं तुम्हें अपनी सारी विधाएं दे दूंगा। तुम्हें गेहूं से हीरा बनाने की विद्या का अभ्यास कराऊँगा। यह कहते हुए उन्होंने अपने दोनों शिष्यों को गेहूं का एक-एक दाना दिया, और मंत्र पढ़ने को कहा। एक शिष्य मंत्र पढ़ते पढ़ते बेहोश हो गया। जिसके कारण उसका मंत्र अधूरा रह गया, और हीरा नहीं बन सका।

किंतु दूसरे ने पूरा मंत्र पढ़कर गेहूं से हीरा बना दिया। क्योंकि इस विषय में ज्ञान लेने के लिए इसकी इच्छा शक्ति थी। लगन थी, जिसके कारण भूख, प्यास, थकान सभी पर इसने विजयी पा ली थी। वह अपने गुरु के कहे हुए हर एक शब्द का हर एक आज्ञा का पालन करता था। जिसके कारण वह अन्य शिष्यों से अलग था। संत ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए अपने शिष्य को अपना संपूर्ण ज्ञान दे दिया, और अपने शिष्य की झोली में सारी विधाएं डाल दी। क्योंकि यही शिष्य अपने गुरु का सच्चा ज्ञान का अधिकारी था।

इससे हमें यह शिक्षा मिलती है, कि “ज्ञान प्राप्त करना कोई साधारण कार्य नहीं है। इसके लिए हमें एक होकर एक भाव होना आवश्यक है”। और अपने गुरु के समक्ष सर्वस्व समर्पित कर लगन से ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। Moral stories in Hindi for class 8th

New Panchatantra Stories in Hindi ! Best 5 PanchTantra Story Hindi men!

Short moral stories in Hindi for class 8

Moral stories for students of class 8th in Hindi

 

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *